Thursday, March 30, 2017

chalo aaj door kahin chalte hai...
jahan sar pe aasmaan na ho, na pairo tale jameen...
hawao ka daaman thame saath saath tahalte hai...
jahan na aag ki garmi ho, na barf ki thandak...
bas nadiyo k lehro me behte huye nikalte hai...
jahaan koi gulshan na ho, na veerana he rahe...
bas do logo k duniya me subah, shaam dhalte hai...

chalo aaj door kahin chalte hai...

Friday, March 10, 2017

আমি দেখেছি জীবন কে আমার কাছে আস্তে॥
আমার হয়ে আময়ে ভালোবাসতে.....
আমি দেখেছি জীবন কে আমার হাত থেকে ফসকে যেতে...
আমায়ে নিষ্প্রাণ করে চলে যেতে...
তাও আমি ঝরে পরি নী...
আমি দাড়িয়ে আছি.........

আমি মাটি হয়ে ও ॥মাটি তে দাড়িয়ে মাটি কে অনুভব করেছি....
আজ আমি নিজেই নিজের জীবন হয়েছি ॥
আমি নিজেই নিজের.......
আমি ই জীবন...জীবন ই মাটি...
এই মাটির জীবন এ আমি ই চারি দিকে.......

Meri kavita

मेरी कविता मुझसे होके गुजरती है, हर वक़्त से जो वाकिफ़ है , हर रंग से संवरती है, कभी सुबह की रोशनी सी हर जर्रे पे बिखरती है तो कभी रात की चाँदनी सी सबके दिल में उतरती है....... मेरी कविता मुझसे होके गुजरती है.....

मैंने अपने ही कविता को बदलते हुए देखा है, जीवन के हर कदम से कदम मिलाके चलते हुए देखा है, कभी धूप में बर्फ सा पिघलते हुए देखा है, तो कभी चुपचाप शाम की तरह ढलते हुए देखा है....... मैंने अपनी ही कविता को बदलते हुए देखा है...........

मैंने माना है मेरी कविता सबसे खास है, इसमे जीने की आस है, इसमे एक दृढ़ विश्वास है, इसमे जुनून है, पागलपन है, सच की तलाश है...... मैंने माना है मेरी कविता सबसे खास है.....

मेरी कविता अभी पूरी नहीं अधूरी है, क्यौकी कई पंक्तियां और जुडनी जरूरी है, इसमे कई खामियाँ है जो इसकी मजबूरी है, पर फिर भी ये अपने आप में अधूरी होके भी पूरी है...... मेरी कविता अब भी जारी है इसलिए अधूरी है.........

मेरी कविता जारी है........ जारी है.... जारी है......

                                                                 प्रियंका.........