तुम्हें प्रणाम
उन
कठोर चट्टानों को तोड़ कर वे रास्तो के निर्माण में व्यस्त थे
मै
कार पे सवार उन रास्तो पे चली जा रही थी
पहाड़ों
के मोहक नजारों का लुफ्त उठाने
बर्फ
के सफ़ेद चादरों को देखकर मन बहलाने
ऊपर
ऊपर कुछ और ऊपर , वाह क्या दृश्य है
फिर
कार को रोक कर मै उन रास्तों पे उतरी
चाहती
थी उन छटाओं को उन वादियों को कैमरे में उतारना
चंद
ही पल में सांसें फूलने सी लगी थी
काँपने
लगी थी रूह तक रक्त जमने लगा था
मै
दौड़ती हुई कार मैं प्रवेश कर चुकी फिर
चल
पडी गाड़ी मंजिल अभी और ऊपर थी
अब
मुझे इन नजारो के साथ दिखने लगी वो सुंदरता
जो
छिपी थी उन मजदूरो के कर्मठता में
जो
छिपी थी उनकी जीवन की कटुता में
अब
मुझे दिखने लगा एक और खूबसूरत नजारा
जो
छिपी थी उन वर्दी वाले प्रहरियों के जज़्बे में
दया
की दृष्टि से नहीं मै उन्हे प्रेरणा की दृष्टि से देख रही थी
वो
सीखा रहे थे मुझे बाधाओं से लड़ना और मै सीख रही थी
सब
कुछ बड़ा सुंदर सा लग रहा था
मै
मन ही मन उनके कृतज्ञ हो चली थी
उन्होने
ही तो मुझे उन उच्च चोटियों तक पहुँचने का मार्ग दिया है
मै
उनको बार बार शुक्रिया कह रही थी
कोटी
कोटी प्रणाम तुम्हें मेरा हृदय कर रहा था
हे
मजदूर वर्ग हे सेनानियो तुमपे गर्व सा हो रहा था ।
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